मणिपुर की राजधानी इम्फाल और उसके आसपास के पहाड़ी तथा घाटी जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाते हुए 30 अक्टूबर को व्यापक फ्लैग मार्च किया। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम कानून व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया है।
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच सीमा पर स्थित संवेदनशील गांवों और चौकियों पर अतिरिक्त केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। इन इलाकों में दिन-रात गश्ती दल तैनात रहेंगे और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। फ्लैग मार्च का उद्देश्य स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना और शांति व्यवस्था का संदेश देना है।
इम्फाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फ्लैग मार्च में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और राज्य पुलिस के जवान शामिल हुए। उन्होंने संवेदनशील इलाकों का दौरा किया और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी तरह की अफवाह या असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य में पिछले कुछ महीनों से जातीय हिंसा और सांप्रदायिक तनाव के बीच सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पहाड़ी और घाटी जिलों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में अक्सर तनाव की स्थिति बनती रही है। ऐसे में केंद्रीय बलों की मौजूदगी और सक्रिय गश्त से स्थानीय लोगों को राहत मिली है। प्रशासन का कहना है कि शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फ्लैग मार्च और गश्त से अपराधियों में डर पैदा होता है और आम नागरिकों का विश्वास बढ़ता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दीर्घकालिक शांति के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवाद जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की हिंसा को रोकना है।