मणिपुर की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकतक झील, जो न केवल राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है बल्कि पारिस्थितिकी और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इम्फाल स्थित इस झील में तेजी से फैल रही जलकुंभी (वाटर हायसिंथ) और अन्य खरपतवारों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने आधुनिक एक्वा हार्वेस्टर मशीनों का उपयोग शुरू किया है। ये मशीनें झील के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने और जल स्रोत को साफ रखने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही हैं।
लोकतक झील में जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव पिछले कुछ वर्षों में गंभीर चिंता का विषय बन गया था। यह आक्रामक जलीय खरपतवार झील की सतह को ढक लेता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पानी के भीतर तक नहीं पहुंच पाता। इसके परिणामस्वरूप जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है, जिससे जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है। इसके अलावा, यह स्थानीय मछुआरों के लिए नौकायन और मछली पकड़ने में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है।
नवीनतम तकनीक से लैस ये एक्वा हार्वेस्टर मशीनें पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक कुशल और तेज हैं। ये मशीनें झील की सतह से जलकुंभी और अन्य खरपतवारों को एक साथ काटकर इकट्ठा करने में सक्षम हैं, जिससे बड़े क्षेत्र को कम समय में साफ किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इन मशीनों को मैदान में उतारने का उद्देश्य झील के जलग्रहण क्षेत्र को पुनर्जीवित करना और उसकी जैव विविधता को बनाए रखना है।
स्थानीय समुदाय और पर्यावरणविदों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि यह अभियान निरंतर चलाया जाए तो लोकतक झील अपने पुराने स्वरूप को वापस पा सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल मशीनों से सफाई पर्याप्त नहीं है; इसके लिए स्थायी निगरानी और जनभागीदारी की भी आवश्यकता होगी ताकि भविष्य में जलकुंभी का पुनः प्रसार न हो।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए विशेष बजट आवंटित किया है और आने वाले महीनों में और अधिक मशीनों को शामिल करने की योजना है। यह कदम न केवल लोकतक झील के संरक्षण के लिए बल्कि इम्फाल शहर के जल संतुलन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भी दूरगामी लाभ प्रदान करेगा। आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के संयोजन से लोकतक झील को पुनर्जीवित करने की यह मुहिम एक मिसाल बन सकती है।